मानवता की मिसाल बना याशीष फाउंडेशन, सात माह में 50 रक्तदान शिविर आयोजित कर रचा सेवा का स्वर्णिम इतिहास - Savdha chhattisgarh
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मानवता की मिसाल बना याशीष फाउंडेशन, सात माह में 50 रक्तदान शिविर आयोजित कर रचा सेवा का स्वर्णिम इतिहास


परमेश्वर कुमार साहू @राजिम
। जब समाज में संवेदनाएं जीवित होती हैं, तब सेवा केवल एक कार्य नहीं बल्कि जनकल्याण का महायज्ञ बन जाती है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए याशीष फाउंडेशन ने मानव सेवा के क्षेत्र में एक ऐसी अमिट छाप छोड़ी है, जो आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। संस्था ने मात्र सात महीनों में लगातार 50 रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन कर समाज सेवा का एक नया अध्याय लिखा है।

रक्तदान जैसे महादान के माध्यम से याशीष फाउंडेशन ने न केवल लोगों को जागरूक किया, बल्कि उन्हें मानव जीवन बचाने के इस पुण्य कार्य से भी जोड़ा। संस्था के समर्पित कार्यकर्ताओं, रक्तवीरों एवं समाजसेवियों के अथक सहयोग से अब तक 800 से अधिक जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा चुका है। इसका परिणाम यह हुआ कि क्षेत्र में रक्त की कमी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली तथा अनेक परिवारों के चेहरे पर पुनः मुस्कान लौट सकी।

मानवता के इस अनुकरणीय अभियान और निरंतर जनसेवा की भावना को देखते हुए आशीर्वाद ब्लड बैंक के प्रबंध निदेशक (एम.डी.) द्वारा याशीष फाउंडेशन को सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक संस्था का नहीं, बल्कि उन सभी रक्तदाताओं और स्वयंसेवकों का सम्मान है जिन्होंने निस्वार्थ भाव से मानव जीवन बचाने के इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया है।

भीषण गर्मी के इस कठिन दौर में, जब रक्त की उपलब्धता गंभीर चुनौती बनी हुई थी और अनेक स्थानों पर बिना डोनर एक्सचेंज के रक्त उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा था, तब याशीष फाउंडेशन ने आशा की किरण बनकर अपनी जिम्मेदारी निभाई। संस्था के सक्रिय सहयोग से आशीर्वाद ब्लड बैंक, नयापारा राजिम शाखा अनेक जरूरतमंद मरीजों को बिना डोनर उपलब्ध हुए भी समय पर रक्त प्रदान करने में सफल रही। यह उपलब्धि केवल संगठनात्मक सफलता नहीं, बल्कि मानवता के प्रति समर्पण और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।

याशीष फाउंडेशन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उसने सेवा को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में अपनाया। संस्था के सदस्यों ने लोगों के दर्द को अपना दर्द समझते हुए हर जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाने का सतत प्रयास किया। यही कारण है कि केवल 37 दिनों में 121 लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित एवं रक्तदान संपन्न कराकर संस्था ने सेवा का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस प्रयास से अनेक गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला और कई परिवारों को अपने प्रियजनों को खोने के दर्द से बचाया जा सका।

आज याशीष फाउंडेशन का नाम सेवा, समर्पण, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का पर्याय बन चुका है। संस्था का यह सतत अभियान समाज में परोपकार, भाईचारे और मानवता की भावना को मजबूत कर रहा है। रक्तदान के माध्यम से जीवन बचाने का यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगा कि मानव सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता।

आशीर्वाद ब्लड बैंक परिवार, क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों तथा लाभान्वित परिवारों ने याशीष फाउंडेशन के इस अतुलनीय योगदान के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए संस्था के उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर जनसेवा की मंगलकामना की है।

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